रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) में भारतीय नौसेना के लिए तैयार किए जा रहे पहले फ्लीट सपोर्ट शिप (Fleet Support Ship-FSS) को लॉन्च करेंगे। यह कार्यक्रम भारतीय नौसेना की समुद्री लॉजिस्टिक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
फ्लीट सपोर्ट शिप का मुख्य उद्देश्य समुद्र में लंबे समय तक तैनात रहने वाले नौसैनिक पोतों को आवश्यक रसद और सहायता उपलब्ध कराना है। इस तरह के जहाज समुद्री अभियानों के दौरान ईंधन, पानी, खाद्य सामग्री, गोला-बारूद और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
समुद्र में तैनात युद्धपोतों को मिलेगा लॉजिस्टिक सपोर्ट
भारतीय नौसेना के बड़े युद्धपोतों और अन्य जहाजों को लंबी अवधि तक समुद्र में अभियान चलाने के दौरान बार-बार बंदरगाह पर लौटने की जरूरत होती है। फ्लीट सपोर्ट शिप इस आवश्यकता को काफी हद तक कम करने में मदद करते हैं।
FSS समुद्र में ही नौसैनिक पोतों को आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने में सक्षम होते हैं। इससे युद्धपोतों की ऑपरेशनल उपलब्धता और समुद्र में बने रहने की क्षमता बढ़ती है। विशेष रूप से लंबी दूरी के अभियानों और हिंद महासागर क्षेत्र में लगातार समुद्री निगरानी के दौरान ऐसे जहाज महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
स्वदेशी जहाज निर्माण को बढ़ावा
पहले फ्लीट सपोर्ट शिप का निर्माण हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। यह परियोजना भारत की स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता को बढ़ाने और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के प्रयासों से भी जुड़ी है।
देश में बड़े और जटिल नौसैनिक प्लेटफॉर्म के निर्माण की क्षमता लगातार विकसित हो रही है। ऐसे में FSS परियोजना भारतीय शिपयार्डों के लिए तकनीकी अनुभव और उत्पादन क्षमता बढ़ाने का अवसर भी प्रदान करती है।
नौसेना के लिए क्यों महत्वपूर्ण है FSS?
फ्लीट सपोर्ट शिप को सामान्य युद्धपोत की तरह सीधे युद्ध में इस्तेमाल करने के बजाय फ्लीट के सपोर्ट प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार किया जाता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह समुद्र में तैनात नौसैनिक बेड़े को लगातार आवश्यक संसाधन उपलब्ध करा सकता है।
इसके जरिए नौसेना के प्रमुख पोतों को ईंधन और अन्य जरूरी सामग्री की आपूर्ति समुद्र में ही की जा सकती है। इससे नौसैनिक अभियानों की अवधि बढ़ाने और बेड़े की परिचालन क्षमता को बनाए रखने में मदद मिलती है।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
भारत पिछले कुछ वर्षों से रक्षा उत्पादन और सैन्य प्लेटफॉर्म के स्वदेशी निर्माण पर विशेष जोर दे रहा है। युद्धपोतों, पनडुब्बियों और अन्य नौसैनिक प्लेटफॉर्म के निर्माण में घरेलू शिपयार्डों की भूमिका लगातार बढ़ी है।
पहले FSS का लॉन्च इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है। इससे भारतीय नौसेना के लिए आवश्यक लॉजिस्टिक सपोर्ट प्लेटफॉर्म देश में ही तैयार करने की क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।
हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ेगी समुद्री पहुंच
भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति में हिंद महासागर क्षेत्र का विशेष महत्व है। भारतीय नौसेना को इस क्षेत्र में नियमित रूप से लंबी दूरी की तैनाती, निगरानी और समुद्री सुरक्षा अभियान चलाने पड़ते हैं।
फ्लीट सपोर्ट शिप जैसे प्लेटफॉर्म नौसेना को लंबे समय तक समुद्र में सक्रिय रहने में सहायता करते हैं। इससे भारतीय नौसेना की फ्लीट सपोर्ट और समुद्री संचालन क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
कार्यक्रम पर रहेगी नजर
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा FSS-1 का लॉन्च भारतीय नौसेना और देश के स्वदेशी जहाज निर्माण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। इस परियोजना के आगे बढ़ने के साथ भारतीय नौसेना के बेड़े को समुद्र में अधिक प्रभावी लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराने की क्षमता विकसित होगी।
फ्लीट सपोर्ट शिप का निर्माण भारत की बढ़ती नौसैनिक जरूरतों, स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता और रक्षा आत्मनिर्भरता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।








