चमोली। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश के बाद भूस्खलन की घटनाओं ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। चमोली जिले के कर्णप्रयाग विकासखंड के सीमल्ट गांव में सोमवार देर रात करीब 2 बजे अचानक भारी भूस्खलन हुआ। पहाड़ी से बड़ी मात्रा में मलबा और बोल्डर नीचे आने की आवाज से ग्रामीणों में दहशत फैल गई।
रात के समय हुई इस घटना के कारण कुछ समय के लिए गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लोग अपने घरों से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे और आसपास रहने वाले परिवारों में भी भूस्खलन को लेकर चिंता बढ़ गई।
आधी रात को तेज आवाज के साथ आया मलबा
बताया जा रहा है कि सोमवार रात करीब दो बजे अचानक पहाड़ी क्षेत्र में हलचल हुई और इसके बाद भारी मात्रा में मलबा नीचे की ओर खिसकने लगा। अंधेरा होने के कारण ग्रामीणों के लिए स्थिति को तुरंत समझ पाना मुश्किल था। भूस्खलन की आवाज सुनकर लोगों की नींद खुल गई और आसपास के इलाकों में भी इसकी सूचना पहुंची।
पर्वतीय क्षेत्रों में रात के समय भूस्खलन की घटना अधिक संवेदनशील मानी जाती है, क्योंकि अंधेरे में मलबे की दिशा और खतरे का तत्काल आकलन करना कठिन होता है।
चमोली में लगातार सामने आ रही भूस्खलन की घटनाएं
चमोली जिले के कर्णप्रयाग और आसपास के क्षेत्रों में मानसून के दौरान भूस्खलन और पहाड़ी से मलबा गिरने की घटनाएं सामने आती रही हैं। अगस्त में भी लगातार बारिश के कारण कर्णप्रयाग-सिमली क्षेत्र सहित कई मार्गों पर मलबा और बोल्डर आने से आवाजाही प्रभावित हुई थी।
सितंबर में कर्णप्रयाग-नैनीताल हाईवे पर सिमली और सिरोली के बीच भी भारी मलबा और बोल्डर सड़क पर गिरने की घटना सामने आई थी, जिसमें दो युवक बाल-बाल बच गए थे।
ग्रामीणों में बढ़ी चिंता
सीमल्ट गांव में आधी रात को हुए भूस्खलन के बाद ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के बाद जमीन के कमजोर होने से अचानक भूस्खलन का खतरा बना रहता है। ऐसे में संवेदनशील स्थानों के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत होती है।
ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर है, ताकि भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कर संभावित खतरे वाले स्थानों की पहचान की जा सके और आवश्यकता होने पर सुरक्षा के उपाय किए जा सकें।
प्रशासन की निगरानी जरूरी
चमोली जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर जिले को पर्वतीय और भौगोलिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र के रूप में दर्शाया गया है तथा आपात स्थिति के लिए 112 हेल्पलाइन उपलब्ध है।
सीमल्ट में हुई इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर स्थिति पर नजर रखना महत्वपूर्ण है। यदि पहाड़ी से दोबारा मलबा या पत्थर गिरने की आशंका हो तो लोगों को प्रभावित हिस्से से दूरी बनाए रखने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की जरूरत है।
फिलहाल इस घटना ने एक बार फिर चमोली के पर्वतीय गांवों में भूस्खलन के खतरे और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर ध्यान खींचा है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान स्थानीय लोगों और यात्रियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है।








