एशियन खेलों में देश के लिए कांस्य पदक जीतकर लौटीं सीमा का उनके पैतृक गांव रेटा पहुंचने पर ग्रामीणों ने उत्साह और गर्व के साथ स्वागत किया। गांव पहुंचने पर लोगों ने उनका अभिनंदन किया और उनकी उपलब्धि को क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बताया। इस दौरान सीमा ने युवाओं से नशे से दूर रहकर खेल और सकारात्मक गतिविधियों को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।
सीमा के गांव पहुंचते ही माहौल उत्सव जैसा हो गया। ग्रामीणों, परिजनों और स्थानीय लोगों ने उनका स्वागत करते हुए उनकी खेल उपलब्धि पर खुशी जताई। लोगों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर सीमा ने न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
मां को पहनाया अपना कांस्य पदक
स्वागत कार्यक्रम के दौरान सीमा ने अपने कांस्य पदक को अपनी मां को पहनाकर उनके प्रति सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव व्यक्त किया। यह पल वहां मौजूद लोगों के लिए भी बेहद भावुक रहा। सीमा की इस उपलब्धि के पीछे परिवार के सहयोग और प्रोत्साहन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सीमा ने अपनी सफलता को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं माना, बल्कि इसे परिवार, गांव और देश के सम्मान से जोड़ते हुए आगे भी बेहतर प्रदर्शन करने का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य आने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए और पदक जीतना है।
युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील
पदक विजेता सीमा ने विशेष रूप से युवाओं को नशे की बढ़ती प्रवृत्ति से दूर रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि युवा अपनी ऊर्जा और समय को खेल, शिक्षा तथा रचनात्मक कार्यों में लगाएं। खेल न केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम है, बल्कि इससे अनुशासन, आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की भावना भी विकसित होती है।
उन्होंने युवाओं को मेहनत और लगन के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया। सीमा का संदेश खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों और युवाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां खेल प्रतिभाओं को सही दिशा और अवसर मिलने पर वे बड़े मंच तक पहुंच सकते हैं।
गांव के लिए प्रेरणा बनीं सीमा
सीमा की उपलब्धि से रेटा गांव में भी खेलों को लेकर उत्साह बढ़ा है। ग्रामीणों का मानना है कि उनकी सफलता गांव के अन्य बच्चों को भी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी। परिवार और ग्रामीणों के बीच सीमा की उपलब्धि को लेकर गर्व का माहौल रहा।
सीमा ने भी इस मौके पर स्पष्ट किया कि कांस्य पदक उनके सफर का अंतिम पड़ाव नहीं है। वह भविष्य में और अधिक मेहनत कर देश के लिए बेहतर प्रदर्शन करना चाहती हैं। उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के पदकों की संख्या बढ़ाने में अपना योगदान देना है।








