भोपाल। रीवा जिले में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी परियोजना जल्द पूरी होने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्लीमनाबाद टनल का काम तेजी से पूर्णता की ओर बढ़ रहा है। इसके पूरा होने के बाद नर्मदा नदी का पानी रीवा जिले के खेतों तक पहुंचाया जा सकेगा। इससे क्षेत्र में सिंचाई के साथ पेयजल सुविधाओं को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मंत्रालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रीवा जिले में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव से जुड़े कार्यक्रम में किसानों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि खेती-किसानी, विशेष रूप से उद्यानिकी और प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में रीवा के किसानों ने अपनी मेहनत और नवाचार के दम पर अलग पहचान बनाई है।
धान, गेहूं से लेकर सोयाबीन तक अच्छी पैदावार
मुख्यमंत्री ने कहा कि रीवा के किसानों की मेहनत का असर जिले की कृषि अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देता है। यहां किसान धान, गेहूं, चना, मसूर, अलसी और सोयाबीन जैसी विभिन्न फसलों का उत्पादन कर रहे हैं।
कृषि में विविधता और उत्पादन बढ़ने से किसानों की आय के साथ-साथ जिले की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है। मुख्यमंत्री ने किसानों से पारंपरिक फसलों के साथ नई तकनीकों और वैकल्पिक कृषि गतिविधियों को अपनाने का आह्वान किया।
स्लीमनाबाद टनल से सिंचाई व्यवस्था को मिलेगा विस्तार
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को बताया कि स्लीमनाबाद टनल का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। परियोजना के पूरा होने के बाद रीवा जिले के खेतों तक नर्मदा जल पहुंचने का रास्ता साफ होगा।
उन्होंने कहा कि इससे किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही क्षेत्र में पेयजल की उपलब्धता को भी लाभ मिल सकता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि रीवा जिले में त्योंथर, लोंही, सिरमौर और सेमरिया सिंचाई परियोजनाओं के पूरा होने के बाद लगभग 1 लाख 32 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने का अनुमान है।
सिंचाई का दायरा बढ़ने से किसानों को मौसम पर निर्भरता कम करने और फसल विविधीकरण के लिए बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है।
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पट्टाधारकों को नि:शुल्क रजिस्ट्री का लाभ
मुख्यमंत्री ने किसानों और भूमि धारकों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण घोषणा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के पास भूमि के पट्टे हैं, लेकिन अभी तक उनकी रजिस्ट्री नहीं हुई है, ऐसे पट्टाधारकों की रजिस्ट्री राज्य सरकार नि:शुल्क कराएगी।
सरकार द्वारा करीब 50 लाख पट्टों की रजिस्ट्री का शुल्क स्वयं वहन किया जाएगा। मुख्यमंत्री के अनुसार इस प्रक्रिया पर लगभग 4 हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जिसे राज्य सरकार वहन करेगी।
प्रगतिशील किसानों से मुख्यमंत्री ने किया संवाद
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रीवा जिले के जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ चार प्रगतिशील किसानों से सीधे संवाद किया। उन्होंने किसानों से पारंपरिक खेती और वर्तमान समय में अपनाई जा रही नई कृषि पद्धतियों के अनुभवों के बारे में जानकारी ली।
किसानों ने बताया कि आधुनिक कृषि यंत्रों के इस्तेमाल से तकनीकी खेती को बढ़ावा मिला है। वहीं जैविक खाद और प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को अपनाने से भी खेती में लाभ देखने को मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने किसानों के अनुभवों को सुनते हुए जिले के अन्य किसानों को भी खेती में तकनीक और प्राकृतिक पद्धतियों का संतुलित इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया।
एक हजार हेक्टेयर में विकसित होगा प्राकृतिक खेती क्लस्टर
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए रीवा जिले में एक हजार हेक्टेयर क्षेत्र को नैचुरल फार्मिंग क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती से जुड़ी तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता की जरूरत है। इसी क्रम में बसामन मामा गो-अभयारण्य को गौ-संवर्धन के साथ ग्रामीण स्वावलंबन के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
यहां संचालित प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण केन्द्र के माध्यम से किसानों को जीवामृत, घन जीवामृत और प्राकृतिक खेती की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। इसका उद्देश्य किसानों को रासायनिक इनपुट पर निर्भरता कम करने और स्थानीय संसाधनों के उपयोग से खेती की दिशा में प्रोत्साहित करना है।
अमरूद, आंवला और कटहल के उत्पादन में भी पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि रीवा के किसान अब केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं हैं। जिले में उद्यानिकी के क्षेत्र में भी लगातार विस्तार हो रहा है। अमरूद, आंवला और कटहल का बड़े स्तर पर उत्पादन जिले की कृषि विविधता को दर्शाता है।
उन्होंने किसानों से फसल विविधीकरण पर जोर देते हुए कहा कि उद्यानिकी फसलों के साथ प्राकृतिक खेती और पशुपालन को कृषि गतिविधियों से जोड़कर किसान अपनी आय के नए स्रोत विकसित कर सकते हैं।
श्रीअन्न की खेती को भी मिल रहा बढ़ावा
रीवा में मोटे अनाज यानी श्रीअन्न के उत्पादन को बढ़ावा देने पर भी सरकार का जोर है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य मिलेट मिशन के तहत कोदो-कुटकी जैसी फसलों का क्षेत्र विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि श्रीअन्न की खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ परिवारों की पोषण सुरक्षा के लिए भी उपयोगी है। ऐसे में किसानों को पारंपरिक खेती के साथ मिलेट और अन्य वैकल्पिक फसलों को भी अपनाने के लिए आगे आना चाहिए।
पशुपालन और फसल विविधीकरण पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने जिले के किसानों से प्राकृतिक खेती, उद्यानिकी, श्रीअन्न, पशुपालन और फसल विविधीकरण को कृषि व्यवस्था का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि बदलती कृषि परिस्थितियों में किसानों के लिए केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग कृषि गतिविधियों को अपनाना उपयोगी हो सकता है। इससे खेती को अधिक विविध और टिकाऊ बनाने के अवसर मिलते हैं।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश और रीवा जिले के किसानों को तेजा दशमी, डोल ग्यारस और गणेशोत्सव की शुभकामनाएं दीं।








