विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोमवार को मिड-करियर ट्रेनिंग प्रोग्राम (टू) में हिस्सा ले रहे भारतीय विदेश सेवा (IFS) के 2011 बैच के अधिकारियों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों के साथ विदेश नीति, कूटनीतिक चुनौतियों और बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया।
विदेश मंत्रालय में आयोजित इस संवाद का उद्देश्य अधिकारियों के अनुभवों को साझा करना और उनकी पेशेवर क्षमताओं को और मजबूत करना है। मिड-करियर प्रशिक्षण कार्यक्रम भारतीय विदेश सेवा के अधिकारियों को उनके कार्यक्षेत्र में नई चुनौतियों के लिए तैयार करने तथा नेतृत्व क्षमता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
डॉ. एस. जयशंकर ने अधिकारियों के साथ संवाद के दौरान अंतरराष्ट्रीय संबंधों में हो रहे बदलावों और भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव के संदर्भ में कूटनीतिक सेवा की जिम्मेदारियों पर चर्चा की। वर्तमान समय में भारत के सामने व्यापार, सुरक्षा, तकनीक, ऊर्जा और विभिन्न देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। ऐसे में विदेश सेवा के अधिकारियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी विदेशों में भारत के हितों का प्रतिनिधित्व करने, द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का पक्ष रखने और विदेशों में भारतीय नागरिकों की सहायता करने जैसी जिम्मेदारियां निभाते हैं। इसलिए समय-समय पर प्रशिक्षण और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संवाद उनके पेशेवर विकास के लिए उपयोगी माना जाता है।
मिड-करियर ट्रेनिंग प्रोग्राम के माध्यम से अधिकारियों को अपने अनुभवों का मूल्यांकन करने, नई नीतियों और कार्यप्रणालियों को समझने तथा बदलती कूटनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप अपनी दक्षता बढ़ाने का अवसर मिलता है।
विदेश मंत्री और 2011 बैच के IFS अधिकारियों के बीच यह संवाद भारतीय कूटनीतिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने तथा देश के विदेश नीति संबंधी लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।








