भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भारतीय नौसेना का युद्धपोत INS सह्याद्रि द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास इंद्र-2026 में भाग लेने के लिए रूस पहुंच गया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस अभ्यास में भारतीय नौसेना की भागीदारी दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा संबंधों और सामरिक सहयोग को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर है।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि INS सह्याद्रि की इस अभ्यास में भागीदारी भारत के समुद्री दृष्टिकोण और महासागर विजन के अनुरूप है। इस पहल का उद्देश्य समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना, साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की क्षमता विकसित करना और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता को प्रोत्साहित करना है।
इंद्र अभ्यास भारत और रूस की नौसेनाओं के बीच आयोजित होने वाला द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास है। इसके माध्यम से दोनों देशों की नौसेनाओं को संयुक्त संचालन की प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने, आपसी समन्वय बढ़ाने और समुद्री सुरक्षा से जुड़े अनुभव साझा करने का अवसर मिलता है।
अभ्यास के दौरान दोनों देशों के नौसैनिक विभिन्न परिचालन गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। इस तरह के संयुक्त अभ्यास से संचार व्यवस्था, सामरिक तालमेल और समुद्र में एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने की क्षमता को मजबूत करने में मदद मिलती है।
INS सह्याद्रि भारतीय नौसेना का स्वदेश निर्मित स्टील्थ फ्रिगेट है, जिसे समुद्री निगरानी, सतह पर मौजूद खतरों से निपटने और विभिन्न नौसैनिक अभियानों के लिए तैयार किया गया है। इसकी तैनाती भारत की समुद्री परिचालन क्षमता और अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक सहयोग में भागीदारी को दर्शाती है।
भारत और रूस के बीच रक्षा संबंध कई दशकों पुराने हैं। दोनों देश सैन्य प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास और रक्षा उपकरणों से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग करते रहे हैं। इंद्र-2026 जैसे अभ्यास इस साझेदारी को व्यावहारिक रूप देने और दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी समझ बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, INS सह्याद्रि की भागीदारी भारत की समुद्री प्रतिबद्धताओं और मित्र देशों के साथ सहयोग बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा है।








