रांची, 8 अक्टूबर। झारखंड की कृषि व्यवस्था को आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और नवाचार से जोड़ने की दिशा में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण पहल हुई। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रांची के गढ़खटंगा स्थित आईसीएआर-भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (आईसीएआर-आईआईएबी) के नवनिर्मित भवनों और नई सुविधाओं का उद्घाटन किया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी भी मौजूद रहे।
उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि रांची आने वाले समय में कृषि जैव प्रौद्योगिकी और अनुसंधान का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार के साथ मिलकर राज्य की भौगोलिक और कृषि परिस्थितियों के अनुरूप एक प्रभावी कृषि रोडमैप तैयार किया जाएगा, जिससे किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर बीज और वैज्ञानिक खेती का सीधा लाभ मिल सके।
कार्यक्रम में संस्थान के एडमिन-कम-स्कूल भवन, बिरसा मुंडा बहुउद्देशीय सभागार, जयपाल सिंह मुंडा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और नेक्स्टजेन ब्रीडिंग फैसिलिटी का शुभारंभ किया गया। इसके अलावा नए गेस्ट हाउस की आधारशिला भी रखी गई। इसकी अनुमानित लागत करीब 119 करोड़ रुपये बताई गई है।
इस अवसर पर आयोजित पूर्व-रबी किसान गोष्ठी में रांची, खूंटी, गुमला और रामगढ़ सहित आसपास के जिलों से करीब 1,500 किसान शामिल हुए। किसानों को फसल विविधीकरण, एकीकृत कृषि प्रणाली, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, डेयरी, पशुधन प्रबंधन, लाख की खेती और कीट नियंत्रण जैसी तकनीकों की जानकारी दी गई।
किसानों के बीच उन्नत बीज, नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, मिनरल मिक्सचर, गेहूं, सरसों, मटर और सब्जियों के बीज किट सहित विभिन्न कृषि सामग्री वितरित की गई। मिल्क कैन कूलर और अन्य उपयोगी उपकरण भी किसानों को दिए गए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि की चुनौतियों का समाधान केवल आधुनिक तकनीक से नहीं, बल्कि पारंपरिक ज्ञान और वैज्ञानिक अनुसंधान के बेहतर समन्वय से संभव है। उन्होंने वैज्ञानिकों से ‘लैब टू लैंड’ की अवधारणा को और मजबूत करने तथा शोध का सीधा लाभ किसानों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट ने झारखंड में एकीकृत कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार फसल और किस्मों के चयन, पशुधन उत्पादकता बढ़ाने तथा मिट्टी से जुड़ी समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान पर विशेष ध्यान देने की बात कही।
राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य किसानों की समृद्धि के बिना पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने मृदा परीक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग और किसान उत्पादक संगठनों को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों, अधिकारियों, विद्यार्थियों और बड़ी संख्या में किसानों की मौजूदगी रही। आयोजन ने झारखंड में कृषि अनुसंधान, जैव प्रौद्योगिकी और किसान-केंद्रित नवाचारों को नई गति देने की उम्मीद मजबूत की है।








