जयशंकर का दो दिवसीय घाना दौरा आज से, फार्मा से IT तक कई क्षेत्रों में सहयोग पर होगी चर्चा

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भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर आज, 6 अक्टूबर से घाना के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर जा रहे हैं। उनका यह दौरा 6 और 7 अक्टूबर को होगा। घाना के विदेश मंत्री सैमुअल ओकुदजेटो एब्लाक्वा के निमंत्रण पर हो रहे इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और घाना के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना तथा आर्थिक एवं विकास से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाना है।

फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में सहयोग पर विशेष जोर

घाना के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच बातचीत में फार्मास्यूटिकल विकास प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेगा। भारत दवा निर्माण और किफायती जेनेरिक दवाओं के क्षेत्र में लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच दवा उत्पादन, स्वास्थ्य सेवाओं और संबंधित क्षमताओं को लेकर सहयोग बढ़ाने के रास्तों पर चर्चा हो सकती है।

भारत और घाना के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में पहले भी सहयोग के प्रयास हुए हैं। भारत के प्रधानमंत्री की घाना यात्रा के दौरान जन औषधि केंद्रों के माध्यम से किफायती स्वास्थ्य सेवाओं, वैक्सीन उत्पादन और अन्य स्वास्थ्य सहयोग पर भी चर्चा की गई थी।

कृषि में मशीनीकरण और वैल्यू एडिशन पर बातचीत

दौरे के दौरान कृषि क्षेत्र में मशीनीकरण और वैल्यू एडिशन को लेकर भी सहयोग बढ़ाने पर विचार किया जाएगा। घाना अपनी कृषि व्यवस्था में आधुनिक तकनीक और बेहतर उत्पादन प्रणालियों को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है। भारत के कृषि तकनीक और कृषि मशीनरी से जुड़े अनुभव दोनों देशों के लिए सहयोग का एक क्षेत्र बन सकते हैं।

इस सहयोग का उद्देश्य केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और उनसे जुड़े मूल्यवर्धन को मजबूत करना भी हो सकता है।

औद्योगिकीकरण और रोजगार सृजन भी एजेंडे में

जयशंकर की यात्रा के दौरान घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा के औद्योगिकीकरण और रोजगार सृजन के एजेंडे से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होगी। घाना सरकार की ‘Accra Reset’ नीति के संदर्भ में भारत के साथ औद्योगिक और आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर बातचीत की जाएगी।

दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के साथ-साथ तकनीकी सहयोग तथा क्षमता निर्माण को भी इस व्यापक आर्थिक साझेदारी का हिस्सा बनाया जा सकता है।

IT और छात्रवृत्ति सहयोग का विस्तार

बैठक में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) साझेदारी और छात्रवृत्ति कार्यक्रमों को विस्तार देने पर भी बातचीत प्रस्तावित है। शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में भारत पहले से ही अफ्रीकी देशों के साथ विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से जुड़ा हुआ है। घाना के युवाओं के लिए प्रशिक्षण और उच्च शिक्षा के अवसरों को बढ़ाना दोनों देशों के संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।

भारत और घाना के बीच तकनीकी सहयोग का एक महत्वपूर्ण आधार Ghana-India Kofi Annan Centre of Excellence in ICT भी है, जो डिजिटल और ICT क्षमता निर्माण से जुड़े कार्यक्रमों में काम करता है।

समुद्री और बंदरगाह सहयोग की पृष्ठभूमि भी महत्वपूर्ण

जयशंकर की यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच समुद्री और बंदरगाह क्षेत्र में भी बातचीत हुई है। जुलाई 2026 में भारत के घाना में नामित उच्चायुक्त सुरिंदर भगत ने Ghana Ports and Harbours Authority तथा Ghana Maritime Authority के अधिकारियों के साथ मुलाकात कर समुद्री सहयोग और भारतीय नाविकों की सुरक्षा एवं कल्याण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की थी।

इससे संकेत मिलता है कि भारत-घाना संबंधों में अब केवल राजनीतिक संवाद ही नहीं, बल्कि व्यापार, स्वास्थ्य, कृषि, तकनीक, समुद्री क्षेत्र और मानव संसाधन विकास जैसे व्यावहारिक क्षेत्रों को भी प्रमुखता दी जा रही है।

भारत-घाना संबंधों के लिए अहम दौरा

जयशंकर का 6-7 अक्टूबर का दौरा दोनों देशों के बीच पहले से जारी सहयोग को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। घाना के विदेश मंत्रालय ने इसे दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों और साझा मूल्यों को और मजबूत करने वाला दौरा बताया है।

दौरे के दौरान होने वाली उच्चस्तरीय बातचीत में यदि क्षेत्रवार ठोस सहमति बनती है, तो इससे भारत और घाना के बीच स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, शिक्षा और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में आने वाले समय में नए सहयोग के रास्ते खुल सकते हैं।

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