RBI MPC बैठक आज से शुरू, रेपो रेट पर टिकी नजर; 7 अक्टूबर को आएगा फैसला

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अक्टूबर बैठक सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 से शुरू हो गई है। तीन दिन तक चलने वाली यह बैठक 7 अक्टूबर को समाप्त होगी। बैठक के दौरान महंगाई, आर्थिक विकास, वैश्विक परिस्थितियों और वित्तीय बाजारों समेत कई महत्वपूर्ण आर्थिक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। सबसे ज्यादा नजर रेपो रेट को लेकर होने वाले फैसले पर रहेगी।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा बुधवार, 7 अक्टूबर को मौद्रिक नीति समिति के फैसलों की घोषणा करेंगे। मौजूदा समय में रेपो रेट 5.25 प्रतिशत है और अगस्त की पिछली बैठक में इसे लगातार चौथी बार यथावत रखा गया था।

रेपो रेट में बढ़ोतरी की चर्चा तेज

इस बार की MPC बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि बाजार और अर्थशास्त्रियों के बीच रेपो रेट बढ़ाए जाने की संभावना पर चर्चा तेज है। कई अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि RBI रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है, जिससे यह 5.50 प्रतिशत हो जाएगा। हालांकि, अंतिम फैसला MPC की बैठक में लिए जाने के बाद ही स्पष्ट होगा।

यदि दरों में बढ़ोतरी होती है, तो यह फरवरी 2023 के बाद RBI की पहली रेपो रेट बढ़ोतरी होगी। हालांकि इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है।

महंगाई बनी बड़ी चिंता

MPC के सामने सबसे अहम मुद्दों में महंगाई शामिल है। अगस्त 2026 में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई थी, जो RBI के 4 प्रतिशत के मध्यम अवधि के लक्ष्य से लगातार तीसरे महीने ऊपर रही। ऐसे में केंद्रीय बैंक के लिए महंगाई को नियंत्रित रखना महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है।

इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकती हैं। तेल की कीमतों में तेजी से भारत के आयात बिल और घरेलू महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।

आर्थिक विकास पर भी रहेगी नजर

MPC बैठक में सिर्फ महंगाई और ब्याज दर ही नहीं, बल्कि आर्थिक विकास की स्थिति पर भी चर्चा होगी। RBI ने अगस्त की मौद्रिक नीति समीक्षा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि का अनुमान 6.7 प्रतिशत रखा था।

हाल के आर्थिक आंकड़ों और घरेलू गतिविधियों को देखते हुए कुछ अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक अपने विकास अनुमान में बदलाव कर सकता है। हालांकि अंतिम तस्वीर 7 अक्टूबर को सामने आएगी।

आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?

रेपो रेट वह प्रमुख दर है जिस पर RBI बैंकों को अल्पकालिक अवधि के लिए धन उपलब्ध कराता है। इसमें बदलाव का असर धीरे-धीरे बैंकिंग सिस्टम की ब्याज दरों पर पड़ सकता है।

अगर रेपो रेट बढ़ती है तो फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज महंगे हो सकते हैं। वहीं, बैंक जमा और FD की ब्याज दरों में भी बदलाव की संभावना रहती है। इसके विपरीत, अगर RBI दरों को स्थिर रखता है तो मौजूदा ब्याज दरों में तत्काल बड़ा बदलाव होने की संभावना कम रहेगी।

बाजार की नजर 7 अक्टूबर के फैसले पर

RBI की तीन दिवसीय बैठक के दौरान MPC के छह सदस्य आर्थिक परिस्थितियों और उपलब्ध आंकड़ों का आकलन करेंगे। इसके बाद समिति के फैसले की घोषणा 7 अक्टूबर को RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा करेंगे।

फिलहाल बाजार की नजर इस बात पर है कि केंद्रीय बैंक 5.25 प्रतिशत की मौजूदा रेपो रेट को बरकरार रखता है या उसमें 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करता है। बैठक का फैसला आने के बाद इसका असर कर्ज लेने वालों, बैंकों, निवेशकों और शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है।

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