प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए आयोग की 100 वर्षों की यात्रा और देश की प्रशासनिक व्यवस्था में उसकी भूमिका का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक सदी के दौरान देश में पीढ़ियां बदलीं, अलग-अलग सरकारें आईं, तकनीक में बड़े बदलाव हुए और पाठ्यक्रमों में भी समय के अनुसार परिवर्तन हुए, लेकिन UPSC के प्रति लोगों का भरोसा लगातार बना रहा।
प्रधानमंत्री ने UPSC को ऐसी संस्था के रूप में रेखांकित किया, जिसकी पहचान लंबे समय से निष्पक्षता, चयन प्रक्रिया और सार्वजनिक विश्वास से जुड़ी रही है। उन्होंने कहा कि बदलते समय के बावजूद संस्था के प्रति कायम भरोसा उसकी महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है।
100 वर्षों की यात्रा में कई बदलाव
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में UPSC की एक सदी की यात्रा को देश में आए व्यापक बदलावों के संदर्भ में रखा। उन्होंने कहा कि इन वर्षों में भारत ने सामाजिक, प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर कई परिवर्तन देखे हैं। नई पीढ़ियां सामने आईं और शासन-प्रशासन के काम करने के तरीकों में भी बदलाव आया।
तकनीक के विस्तार ने सरकारी प्रक्रियाओं और सेवाओं के स्वरूप को भी प्रभावित किया है। इसी के साथ शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के पाठ्यक्रम में समय की आवश्यकताओं के अनुसार बदलाव किए गए हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार, इन तमाम परिवर्तनों के बीच UPSC के प्रति विश्वास की निरंतरता महत्वपूर्ण है।
प्रशासनिक सेवाओं के लिए चयन में आयोग की भूमिका
UPSC देश की विभिन्न प्रतिष्ठित केंद्रीय सेवाओं के लिए चयन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से प्रतिभाओं का चयन कर उन्हें प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा बनने का अवसर मिलता है।
प्रधानमंत्री के संबोधन में इसी व्यापक भूमिका को संस्था की दीर्घकालिक यात्रा से जोड़कर देखा गया। एक सदी के दौरान देश की जरूरतों और प्रशासनिक चुनौतियों में बदलाव आया है, ऐसे में चयन प्रक्रिया से जुड़ी संस्थाओं के सामने भी समय के अनुरूप खुद को विकसित करने की आवश्यकता रही है।
बदलती तकनीक के साथ बदलती व्यवस्था
आज प्रशासन और सार्वजनिक सेवाओं में तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ी है। डिजिटल माध्यमों ने सरकारी कामकाज, सूचना के आदान-प्रदान और नागरिक सेवाओं की प्रक्रिया को प्रभावित किया है। ऐसे दौर में प्रतियोगी परीक्षाओं और चयन प्रक्रियाओं में भी तकनीकी बदलावों का महत्व बढ़ा है।
प्रधानमंत्री ने UPSC की 100 वर्ष की यात्रा का उल्लेख करते हुए इसी बदलाव की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि तकनीक और अन्य व्यवस्थाओं में परिवर्तन के बावजूद संस्था के प्रति लोगों का विश्वास बना रहना उसकी निरंतरता को दर्शाता है।
युवाओं और भावी प्रशासकों के लिए महत्व
UPSC की परीक्षाओं में देशभर से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी हिस्सा लेते हैं। चयन प्रक्रिया से गुजरने वाले उम्मीदवारों के लिए आयोग केवल एक परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था नहीं, बल्कि सार्वजनिक सेवा में प्रवेश का महत्वपूर्ण माध्यम है।
शताब्दी समारोह के अवसर पर प्रधानमंत्री का संबोधन ऐसे समय में आया जब देश की प्रशासनिक व्यवस्था नई तकनीकों, बदलती सामाजिक जरूरतों और तेजी से बदलते कार्य परिवेश के साथ आगे बढ़ रही है। ऐसे में भावी लोक सेवकों से भी नई परिस्थितियों को समझने और नागरिक-केंद्रित प्रशासन की जरूरतों के अनुरूप काम करने की अपेक्षा रहती है।
एक सदी के भरोसे का उल्लेख
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में UPSC की 100 साल की यात्रा को केवल संस्थागत इतिहास के तौर पर नहीं, बल्कि बदलते भारत के साथ जुड़ी यात्रा के रूप में प्रस्तुत किया। उनके अनुसार, पीढ़ियों, सरकारों, तकनीक और पाठ्यक्रमों में बदलाव के बावजूद UPSC के प्रति भरोसा कायम रहना संस्था की दीर्घकालिक भूमिका को दर्शाता है।
शताब्दी समारोह इस ऐतिहासिक यात्रा को याद करने के साथ-साथ भविष्य की प्रशासनिक आवश्यकताओं और बदलते समय के अनुरूप संस्थागत प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने के अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है।








