सरसावा के झबीरण गांव में जश्न का माहौल, ढोल-नगाड़ों के बीच ग्रामीणों ने बांटी मिठाई; किसान पिता ने सीमित संसाधनों में बेटी के सपने को दी उड़ान
सहारनपुर। जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियाई खेलों में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले की बेटी प्राची चौधरी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं की 4×400 मीटर रिले स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। प्राची की इस उपलब्धि की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव झबीरण पहुंची, पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई।
गांव में लोगों ने ढोल बजाकर जश्न मनाया और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर प्राची की सफलता की बधाई दी। ग्रामीणों के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास रही क्योंकि गांव की बेटी ने अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के साथ-साथ सहारनपुर का नाम भी रोशन किया है।
प्राची की जीत की खबर से गांव में जश्न
प्राची चौधरी की स्वर्ण पदक जीतने की जानकारी मिलते ही सरसावा क्षेत्र के झबीरण गांव में उत्सव जैसा माहौल बन गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हुए और ढोल की थाप पर खुशी मनाई।
लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी। गांव के लोगों के बीच प्राची की उपलब्धि चर्चा का विषय बनी रही। परिवार और ग्रामीणों के लिए यह सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और संघर्ष के परिणाम के रूप में देखा जा रहा है।
किसान पिता ने बेटी के सपने को पूरा करने में नहीं छोड़ी कसर
प्राची चौधरी के पिता जयवीर सिंह किसान हैं। बेटी के खेल करियर के शुरुआती दौर में परिवार के सामने संसाधनों की सीमाएं थीं, लेकिन इसके बावजूद जयवीर सिंह ने प्राची को आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया।
खेल प्रशिक्षण के दौरान जब प्राची को बेहतर जूतों की जरूरत पड़ी तो आर्थिक परिस्थितियां आसान नहीं थीं। इसके बावजूद पिता ने बेटी की जरूरत को प्राथमिकता देते हुए उधार लेकर उसके लिए जूते खरीदे।
परिवार के इस सहयोग ने प्राची के खेल सफर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कठिन परिस्थितियों के बीच अभ्यास जारी रखते हुए उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई और अब एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर अपने परिवार की मेहनत को बड़ी उपलब्धि में बदल दिया।
मां ने कहा- बेटी ने परिवार और जिले को गौरवान्वित किया
प्राची की सफलता से उनकी मां राजेश देवी भी बेहद खुश हैं। उन्होंने बेटी की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि प्राची ने स्वर्ण पदक जीतकर न केवल देश का नाम रोशन किया है, बल्कि अपने परिवार और पूरे सहारनपुर जिले को भी गौरवान्वित किया है।
परिवार के लिए प्राची का यह सफर लंबे संघर्ष और मेहनत से जुड़ा रहा है। ऐसे में एशियाई खेलों के मंच पर स्वर्ण पदक जीतना उनके लिए गर्व का विशेष क्षण है।
स्पोर्ट्स स्टेडियम में भी खिलाड़ियों ने मनाई खुशी
प्राची चौधरी की उपलब्धि की खबर सहारनपुर के खेल जगत में भी उत्साह लेकर आई। स्पोर्ट्स स्टेडियम में खिलाड़ियों ने मिठाई बांटकर उनकी सफलता का जश्न मनाया।
खेल से जुड़े लोगों और खिलाड़ियों के बीच प्राची की उपलब्धि को लेकर उत्साह देखा गया। युवा खिलाड़ियों के लिए भी यह उपलब्धि प्रेरणा का कारण बनी है कि सीमित संसाधनों से शुरुआत करने के बावजूद निरंतर मेहनत और अभ्यास के जरिए बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा जा सकता है।
मेहनत और परिवार के सहयोग का नतीजा बनी उपलब्धि
प्राची चौधरी की कहानी खेल प्रतिभा के साथ परिवार के सहयोग और संघर्ष की भी कहानी है। एक किसान परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना उनके सफर की बड़ी उपलब्धि है।
उनके शुरुआती दौर में बेहतर खेल सुविधाओं और संसाधनों की जरूरत के बावजूद परिवार ने उनका साथ नहीं छोड़ा। पिता द्वारा उधार लेकर जूते खरीदने की घटना इस बात को दर्शाती है कि बेटी के खेल सपने को पूरा करने के लिए परिवार ने अपनी परिस्थितियों के अनुसार हरसंभव प्रयास किया।
एशियाई खेलों में 4×400 मीटर रिले में स्वर्ण पदक जीतने के बाद अब प्राची चौधरी का नाम सहारनपुर के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के साथ जुड़ गया है। उनकी सफलता से गांव, परिवार और स्थानीय खेल समुदाय में खुशी का माहौल है।








