केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दोहा में सऊदी अरब के वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जदान से मुलाकात की। यह बैठक एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) की वार्षिक बैठक के दौरान हुई। बातचीत में भारत और सऊदी अरब के बीच निवेश, व्यापार और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।
बैठक में दोनों पक्षों ने भारत-सऊदी द्विपक्षीय निवेश संधि (Bilateral Investment Treaty-BIT) की वार्ता सफलतापूर्वक पूरी होने का स्वागत किया। इस समझौते को दोनों देशों के बीच निवेश के लिए अधिक स्पष्ट और भरोसेमंद ढांचा तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया। इससे दोनों देशों के निवेशकों के लिए कारोबारी माहौल में स्थिरता और निवेश संबंधी भरोसा बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
जल्द लागू करने पर सऊदी अरब का जोर
मुलाकात के दौरान सऊदी वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जदान ने द्विपक्षीय निवेश संधि को जल्द लागू किए जाने की इच्छा जताई। उन्होंने भारत से सऊदी अरब में निवेश बढ़ाने में भी रुचि व्यक्त की। इसके साथ ही उन्होंने भारत की आर्थिक प्रगति और निवेश माहौल में हो रहे सुधारों पर भी चर्चा की।
निर्मला सीतारमण ने भारत और सऊदी अरब के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध केवल व्यापार और निवेश तक सीमित नहीं हैं। ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, सुरक्षा और अन्य क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
व्यापार और निवेश में बढ़ता सहयोग
भारत और सऊदी अरब के आर्थिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार विस्तारित हुए हैं। आधिकारिक भारतीय आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 41.88 अरब डॉलर रहा। इसमें भारत का सऊदी अरब को निर्यात लगभग 11.76 अरब डॉलर और आयात करीब 30.12 अरब डॉलर रहा।
भारत से सऊदी अरब को इंजीनियरिंग उत्पाद, चावल, पेट्रोलियम उत्पाद, रसायन, कपड़ा और खाद्य उत्पाद जैसे सामान निर्यात किए जाते हैं। वहीं सऊदी अरब से भारत मुख्य रूप से कच्चा तेल, एलपीजी, उर्वरक, रसायन और प्लास्टिक से जुड़े उत्पाद आयात करता है।
दोनों देशों में निवेश बढ़ाने की संभावनाएं
सऊदी अरब की कंपनियों और वहां के निवेश फंडों की भारत में मौजूदगी भी बढ़ी है। ऊर्जा, इस्पात, नवीकरणीय ऊर्जा, रसायन और खाद्य क्षेत्र समेत कई क्षेत्रों में सऊदी निवेश हुआ है। दूसरी ओर भारतीय कंपनियां भी निर्माण, आईटी, वित्तीय सेवाओं, फार्मास्यूटिकल्स, दूरसंचार और अन्य क्षेत्रों में सऊदी अरब में कारोबार कर रही हैं।
बैठक में निवेश के साथ-साथ दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को और बढ़ाने तथा निजी क्षेत्र की भागीदारी मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। निवेश संधि के लागू होने से दोनों देशों के निवेशकों के लिए नियमों और निवेश सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को अधिक स्पष्ट आधार मिलने की उम्मीद है।
रणनीतिक साझेदारी को आर्थिक आधार देने की कोशिश
भारत और सऊदी अरब के संबंधों में आर्थिक और निवेश सहयोग एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी परिषद के तहत आर्थिक एवं निवेश से जुड़े विषयों पर नियमित रूप से काम किया जाता है। इसके अंतर्गत उद्योग एवं बुनियादी ढांचा, कृषि एवं खाद्य सुरक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी तथा ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग शामिल है।
दोहा में हुई निर्मला सीतारमण और मोहम्मद अल-जदान की मुलाकात को इसी व्यापक आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के प्रयास के तौर पर देखा जा सकता है। खास तौर पर द्विपक्षीय निवेश संधि की वार्ता पूरी होने के बाद अब इसके क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ना दोनों देशों के निवेश संबंधों के लिए अगला महत्वपूर्ण चरण होगा।








