बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए छठ महापर्व केवल पूजा का अवसर नहीं, बल्कि उनकी लोक संस्कृति, परंपरा और भावनाओं से गहराई से जुड़ा पर्व है। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में परिवार के साथ पूजा की तैयारियां, घाटों पर होने वाले अनुष्ठान और छठ गीतों की गूंज माहौल को खास बना देती है। इसी सांस्कृतिक जुड़ाव का एक भावुक पल फिल्म ‘द व्वान: फॉरेस्ट ऑफ द फॉरेस्ट’ में देखने को मिला है।
तमन्ना भाटिया, श्वेता तिवारी, सिद्धार्थ मल्होत्रा, सुनील ग्रोवर और अनूप सोनी जैसे कलाकारों से सजी यह फिल्म 25 सितंबर को रिलीज हुई। फिल्म को लेकर दर्शकों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं, लेकिन छठ से जुड़े एक खास दृश्य ने बिहार और पूर्वांचल के दर्शकों का ध्यान खींच लिया।
फिल्म में महान लोकगायिका शारदा सिन्हा का लोकप्रिय छठ गीत ‘पहिले-पहिले हम कईली’ सुनाई देता है। उनकी आवाज थिएटर में गूंजते ही कई दर्शकों को अपने घर, बचपन और छठ पर्व की पुरानी यादें याद आ गईं।
छठ पूजा की तैयारियों के बीच सुनाई दिया गीत
फिल्म के एक दृश्य में श्वेता तिवारी और अनूप सोनी छठ पर्व की तैयारियों से जुड़े नजर आते हैं। इसी दौरान शारदा सिन्हा का लोकप्रिय गीत बजता है।
इस गीत को फिल्म में शामिल करने से छठ पूजा से जुड़े दृश्य को लोक संस्कृति और भावनात्मक जुड़ाव का एक अलग रंग मिला। सोशल मीडिया पर फिल्म देखने वाले कई लोगों ने इस दृश्य को साझा किया और शारदा सिन्हा की आवाज सुनने के अनुभव के बारे में अपनी प्रतिक्रियाएं दीं।
कुछ दर्शकों ने बताया कि थिएटर में यह गीत सुनते ही उन्हें रोंगटे खड़े होने जैसा अनुभव हुआ। वहीं कई लोगों ने इसे अपने बचपन और परिवार के साथ मनाए गए छठ पर्व की यादों से जोड़कर देखा।
दर्शकों ने सोशल मीडिया पर साझा की भावनाएं
गीत को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रियाओं में सबसे ज्यादा चर्चा उसके भावनात्मक प्रभाव की रही। कई लोगों ने कहा कि छठ और शारदा सिन्हा की आवाज का रिश्ता इतना गहरा है कि उनकी आवाज सुनते ही त्योहार का पूरा माहौल आंखों के सामने आ जाता है।
एक दर्शक ने इसे बचपन की यादों से जोड़ते हुए कहा कि यह गीत सुनकर पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। वहीं एक अन्य प्रतिक्रिया में कहा गया कि यह केवल भावना नहीं, बल्कि संस्कृति से जुड़ा अनुभव है।
कुछ ऐसे दर्शकों ने भी गीत की तारीफ की जो मूल रूप से बिहार से नहीं हैं। उनके मुताबिक, गीत में ऐसी भावनात्मक ताकत है जो इसे सुनने वाले को आसानी से प्रभावित करती है।
पहले छठी मैया गीत को लेकर हुई थी चर्चा
फिल्म में छठ से जुड़ा गीत सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर काफी चर्चा हुई थी। कुछ लोगों ने गीत को पसंद किया, जबकि कुछ दर्शकों की राय थी कि इसे भोजपुरी भाषा में प्रस्तुत किया जाता तो क्षेत्रीय जुड़ाव और मजबूत हो सकता था।
हालांकि, फिल्म में शारदा सिन्हा के लोकप्रिय गीत को शामिल किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद दर्शकों को एक अलग तरह का भावनात्मक अनुभव मिला।
शारदा सिन्हा की आवाज और छठ का रिश्ता
शारदा सिन्हा को बिहार की लोक संस्कृति और खासकर छठ गीतों के लिए विशेष पहचान मिली। उनकी आवाज में रिकॉर्ड किए गए कई लोकगीत दशकों से बिहार, झारखंड और पूर्वांचल के घरों में छठ के दौरान सुनाई देते रहे हैं।
‘पहिले-पहिले हम कईली’ भी उनके चर्चित छठ गीतों में शामिल है। छठ के दौरान घाटों, घरों और पूजा की तैयारियों के बीच इस तरह के पारंपरिक गीतों की मौजूदगी त्योहार के माहौल को और जीवंत बनाती है।
इसी वजह से शारदा सिन्हा की आवाज को सुनना कई लोगों के लिए केवल संगीत सुनने तक सीमित नहीं है। यह उनके लिए परिवार, गांव, बचपन और त्योहार से जुड़ी यादों को दोबारा महसूस करने जैसा अनुभव भी बन जाता है।
लोकसंगीत में शारदा सिन्हा का योगदान
शारदा सिन्हा ने हिंदी के साथ-साथ मैथिली, मगही और भोजपुरी लोकसंगीत को भी अपनी आवाज दी। बिहार की लोक परंपराओं को देशभर में पहचान दिलाने में उनके योगदान को महत्वपूर्ण माना जाता है।
संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें 1991 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया। इसके बाद 2000 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और 2018 में पद्म भूषण से भी उन्हें सम्मान मिला।
छठ गीतों के कारण उन्हें लोगों के बीच खास पहचान मिली और उनकी आवाज त्योहार की सांस्कृतिक स्मृतियों का हिस्सा बन गई।
फिल्म के इस दृश्य ने फिर जगाई पुरानी यादें
‘द व्वान’ में शारदा सिन्हा के गीत को शामिल किए जाने से एक बार फिर यह देखने को मिला कि लोकगीत केवल संगीत का माध्यम नहीं होते। कई बार एक आवाज और एक गीत पूरी पीढ़ी की साझा यादों को सामने ला देता है।
छठ पूजा से जुड़े इस दृश्य में शारदा सिन्हा की आवाज ने दर्शकों को अपनी संस्कृति और पुरानी यादों से जोड़ने का काम किया। यही वजह है कि फिल्म के इस हिस्से की चर्चा रिलीज के बाद सोशल मीडिया पर भी देखने को मिल रही है।








